समग्र परिचय
हिंदू धर्म में ध्यान: आत्म-ज्ञान एवं योग के मार्ग
ध्यान क्यों आवश्यक है, राज–ज्ञान–मंत्र पद्धतियाँ, और प्रमुख मार्ग कैसे भिन्न हैं।
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हिंदू ध्यान विज्ञान — ध्यान, कुंडलिनी, नाद, हृदय, योग निद्रा और अन्य
शास्त्रीय हिंदू ध्यान को आत्म-साक्षात्कार के मार्ग के रूप में जानें—वेद, उपनिषद, भगवद्गीता, पतंजलि के योगसूत्र और तांत्रिक सूक्ष्म-शरीर परंपराओं में निहित।
ध्यान कमल
केंद्र से आरंभ करें या ऊर्जा, आत्म-अन्वेषण, नाद, विश्राम और साक्षीभाव की किसी पंखुड़ी को चुनें।
समग्र परिचय
ध्यान क्यों आवश्यक है, राज–ज्ञान–मंत्र पद्धतियाँ, और प्रमुख मार्ग कैसे भिन्न हैं।
मार्गदर्शिका खोलें →सूक्ष्म ऊर्जा
सात चक्र, इड़ा–पिंगला–सुषुम्ना, ग्रंथियाँ, और शक्ति का सहस्रार तक आरोहण।
मार्गदर्शिका खोलें →सूक्ष्म ऊर्जा
मूल, उड्डीयान, जालंधर, महा बंध तथा नाड़ी शोधन, भस्त्रिका और सूर्य भेदन।
मार्गदर्शिका खोलें →सूक्ष्म ऊर्जा
ब्रह्म, विष्णु और रुद्र ग्रंथियाँ—और बंध कैसे उन्हें भेदकर कुंडलिनी आरोहण खोलते हैं।
मार्गदर्शिका खोलें →आत्म-अन्वेषण
अहं-वृत्ति को शुद्ध जागरूकता तक ले जाना—अध्यास, साधना चरण, नेति नेति बनाम विचार।
मार्गदर्शिका खोलें →पवित्र नाद
नाद आरोहण की चार अवस्थाएँ, षण्मुखी मुद्रा, और नादानुसंधान।
मार्गदर्शिका खोलें →आत्म-अन्वेषण
आध्यात्मिक हृदय बनाम अनाहत और भौतिक हृदय, अमृत नाड़ी, और आत्म विचार।
मार्गदर्शिका खोलें →सचेत विश्राम
आठ-चरण ढाँचा, माण्डूक्य अवस्थाएँ, मस्तिष्क तरंगें, और पंच कोश।
मार्गदर्शिका खोलें →साक्षीभाव
वैदिक ध्यान के साथ विपश्यना—अनित्य, चरण, और दार्शनिक भेद।
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