01
परिचय
आहत नाद (आघात से उत्पन्न ध्वनि) के विपरीत, अनाहत नाद सूक्ष्म शरीर में कंपन करती शुद्ध ब्रह्मांडीय चेतना का स्व-अस्तित्व, अनिर्मित कंपन है।
अनाहत नाद
- Hatha Yoga Pradipika (Chapter 4 — Nadanusandhana)
- Nadabindu Upanishad
- Shandilya Upanishad
- Siva Samhita
02
श्रवण की प्रक्रिया
कुंडलिनी के सुषुम्ना में प्रवेश पर दिव्य श्रोत्र (सूक्ष्म श्रवण) से अनुभव होता है।
चित्तवृत्ति निरोध तथा प्राणायाम–बंधों से इड़ा–पिंगला की शुद्धि आवश्यक है।
षण्मुखी मुद्रा से बाह्य इंद्रियाँ बंद कर आंतरिक श्रवण को दाएँ कर्ण की ओर केंद्रित करते हैं।
03
नाद आरोहण की अवस्थाएँ
शारीरिक पहचान विलीन; गहन हल्कापन और आंतरिक ऊष्मा का अनुभव।
भाव आसक्ति और द्वैत अहं छूटते हैं; भक्ति और आंतरिक शांति चेतना को भर देती है।
बौद्धिक गर्व और द्रष्टा-अहं विलीन; अंतर्ज्ञान और सूक्ष्म दर्शन उदय होते हैं।
जीव चेतना का ब्रह्म से मिलन; समाधि और मोक्ष।
04
साधना ढाँचा — नादानुसंधान
षण्मुखी मुद्रा
षण्मुखी मुद्रा — कर्ण, नेत्र, नासिका और मुख बंद कर बाह्य इंद्रिय क्रिया सील करना (प्रत्याहार)।
स्थूल/ऊँची आरंभिक ध्वनियों को छोड़कर सूक्ष्मतर पृष्ठभूमि नाद पर ध्यान दें—जब तक केंद्रीय कंपन शेष न रहे।