नाद · षण्मुखी · सुषुम्ना

अनाहत नाद: तांत्रिक योग में अनाहत ध्वनि

नादानुसंधान — भीतर स्व-अस्तित्व कंपन को सुनना

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परिचय

आहत नाद (आघात से उत्पन्न ध्वनि) के विपरीत, अनाहत नाद सूक्ष्म शरीर में कंपन करती शुद्ध ब्रह्मांडीय चेतना का स्व-अस्तित्व, अनिर्मित कंपन है।

अनाहत नाद

  • Hatha Yoga Pradipika (Chapter 4 — Nadanusandhana)
  • Nadabindu Upanishad
  • Shandilya Upanishad
  • Siva Samhita

02

श्रवण की प्रक्रिया

कुंडलिनी के सुषुम्ना में प्रवेश पर दिव्य श्रोत्र (सूक्ष्म श्रवण) से अनुभव होता है।

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नाद आरोहण की अवस्थाएँ

चक्र: मूलाधार से अनाहत

ग्रंथि: ब्रह्म ग्रंथि

समुद्र की लहरेंदूर जलप्रपात या गर्जनभेरी जैसा गर्जन

शारीरिक पहचान विलीन; गहन हल्कापन और आंतरिक ऊष्मा का अनुभव।

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साधना ढाँचा — नादानुसंधान

षण्मुखी मुद्रा

षण्मुखी मुद्रा — कर्ण, नेत्र, नासिका और मुख बंद कर बाह्य इंद्रिय क्रिया सील करना (प्रत्याहार)।

स्थूल/ऊँची आरंभिक ध्वनियों को छोड़कर सूक्ष्मतर पृष्ठभूमि नाद पर ध्यान दें—जब तक केंद्रीय कंपन शेष न रहे।