कब और क्यों
पारंपरिक समय-नियम
शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि (13वें दिन) को प्रदोष काल (संध्या बेला) में मनाया जाता है।
यह नियम केवल परंपरागत आवृत्ति बताता है। स्थान-विशिष्ट तिथि के लिए विश्वसनीय पंचांग देखें।
परंपरा · समय-नियम · सुरक्षित अभ्यास
पारंपरिक उद्देश्य: भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने, संचित नकारात्मक कर्मों को धोने और जीवन की बाधाओं या मृत्यु के भय को दूर करने के लिए।
शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि (13वें दिन) को प्रदोष काल (संध्या बेला) में मनाया जाता है।
यह नियम केवल परंपरागत आवृत्ति बताता है। स्थान-विशिष्ट तिथि के लिए विश्वसनीय पंचांग देखें।
व्रत की पूर्णता प्रदोष काल में पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करने, शिवलिंग पर बिल्व पत्र और जल/दूध अर्पित करने तथा उसके बाद व्रत खोलने से होती है।