कब और क्यों
पारंपरिक समय-नियम
प्रत्येक चंद्र मास की पूर्णिमा (पूरे चंद्रमा के दिन) को मनाया जाता है।
यह नियम केवल परंपरागत आवृत्ति बताता है। स्थान-विशिष्ट तिथि के लिए विश्वसनीय पंचांग देखें।
परंपरा · समय-नियम · सुरक्षित अभ्यास
पारंपरिक उद्देश्य: भगवान सत्यानारायण (भगवान विष्णु का एक रूप) का सम्मान करने, सत्य को बनाए रखने, घरेलू शांति, समृद्धि और हार्दिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए।
प्रत्येक चंद्र मास की पूर्णिमा (पूरे चंद्रमा के दिन) को मनाया जाता है।
यह नियम केवल परंपरागत आवृत्ति बताता है। स्थान-विशिष्ट तिथि के लिए विश्वसनीय पंचांग देखें।
शाम की सत्यानारायण कथा को सफलतापूर्वक संपन्न करने, परिवार और मेहमानों को प्रसाद वितरित करने और उसके बाद व्रत खोलने से व्रत पूर्ण माना जाता है।