कब और क्यों
पारंपरिक समय-नियम
हिन्दू मास चैत्र (वसन्त) और आश्विन (शरद) में शुक्ल पक्ष के पहले नौ दिनों के दौरान मनाया जाता है।
यह नियम केवल परंपरागत आवृत्ति बताता है। स्थान-विशिष्ट तिथि के लिए विश्वसनीय पंचांग देखें।
परंपरा · समय-नियम · सुरक्षित अभ्यास
पारंपरिक उद्देश्य: दिव्य स्त्री ऊर्जा (शक्ति/नवदुर्गा) का सम्मान करने, आध्यात्मिक शक्ति और आंतरिक परिवर्तन का आह्वान करने तथा मौसमी बदलाव के दौरान मन और शरीर को शुद्ध करने के लिए।
हिन्दू मास चैत्र (वसन्त) और आश्विन (शरद) में शुक्ल पक्ष के पहले नौ दिनों के दौरान मनाया जाता है।
यह नियम केवल परंपरागत आवृत्ति बताता है। स्थान-विशिष्ट तिथि के लिए विश्वसनीय पंचांग देखें।
9 दिनों के आहार और मानसिक अनुशासन को सफलतापूर्वक पूरा करने, अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन करने और उसके बाद व्रत का पारण करने से व्रत पूर्ण माना जाता है।