कब और क्यों
पारंपरिक समय-नियम
चार दिनों तक मनाया जाता है, जो कार्तिक मास (अक्टूबर/नवंबर) के शुक्ल पक्ष की छठी तिथि (षष्ठी) को संपन्न होता है।
यह नियम केवल परंपरागत आवृत्ति बताता है। स्थान-विशिष्ट तिथि के लिए विश्वसनीय पंचांग देखें।
परंपरा · समय-नियम · सुरक्षित अभ्यास
पारंपरिक उद्देश्य: पृथ्वी पर जीवन का पोषण करने के लिए सूर्य देव के प्रति गहरा आभार व्यक्त करने और परिवार के सदस्यों की लंबी उम्र, स्वास्थ्य तथा कल्याण के लिए प्रार्थना करने हेतु।
चार दिनों तक मनाया जाता है, जो कार्तिक मास (अक्टूबर/नवंबर) के शुक्ल पक्ष की छठी तिथि (षष्ठी) को संपन्न होता है।
यह नियम केवल परंपरागत आवृत्ति बताता है। स्थान-विशिष्ट तिथि के लिए विश्वसनीय पंचांग देखें।
उगते सूर्य को अंतिम अर्घ्य सफलतापूर्वक देने और उसके बाद विशेष प्रसाद के साथ व्रत का पारण (व्रत खोलना) करने से व्रत पूर्ण माना जाता है।