ऋषि नारद ने एक बार कृष्ण को स्वर्ग का एक सुंदर पारिजात का फूल भेंट किया। कृष्ण ने वह फूल अपनी पत्नी सत्यभामा को दे दिया। सत्यभामा ने चाहा कि वह पूरा जादुई पेड़ ही उनके अपने बगीचे में लग जाए ताकि सारे फूल सिर्फ उनके पास रहें। कृष्ण ने स्वर्ग से वह पेड़ लाकर सत्यभामा के आंगन में लगा दिया। लेकिन एक जादू हुआ—जब सुबह फूल गिरे, तो हवा के झोंके से आधे फूल दूसरी रानी रुक्मिणी के आंगन में भी चले गए! सत्यभामा समझ गईं कि खुशियों और उपहारों को बांटने से वे कम नहीं होतीं, बल्कि और बढ़ जाती हैं।