गुरु द्रोणाचार्य ने तीरंदाजी की परीक्षा लेने के लिए पेड़ की डाल पर एक लकड़ी की चिड़िया रखी। उन्होंने एक-एक राजकुमार से पूछा कि उन्हें क्या दिख रहा है। किसी ने कहा कि पेड़ दिख रहा है, किसी ने कहा भाई और आसमान दिख रहा है। द्रोणाचार्य ने सबको तीर चलाने से मना कर दिया। जब अर्जुन की बारी आई, तो द्रोणाचार्य ने पूछा, 'तुम्हें क्या दिख रहा है?' अर्जुन ने शांत भाव से कहा, 'गुरुजी, मुझे सिर्फ चिड़िया की आंख दिख रही है और कुछ नहीं।' उन्होंने तीर छोड़ा और सीधा निशाना लगाया।