चुना हुआ अंश
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1
विश्वं विष्णुर्वषट्कारो भूतभव्यभवत्प्रभुः।
भूतकृद्भूतभृद्भावो भूतात्मा भूतभावनः॥
Viśvaṁ Viṣṇur vaṣaṭkāro bhūta-bhavya-bhavat-prabhuḥ.
Bhūtakṛd bhūtabhṛd bhāvo bhūtātmā bhūtabhāvanaḥ.
वे विश्व, सर्वव्यापक और भूत-वर्तमान-भविष्य के प्रभु हैं; प्राणियों के स्रष्टा, धारक, अंतरात्मा और पोषक हैं।
2
पूतात्मा परमात्मा च मुक्तानां परमा गतिः।
अव्ययः पुरुषः साक्षी क्षेत्रज्ञोऽक्षर एव च॥
Pūtātmā Paramātmā cha muktānāṁ paramā gatiḥ.
Avyayaḥ puruṣaḥ sākṣī kṣetrajño'kṣara eva cha.
वे पवित्र आत्मा, परमात्मा और मुक्तों की परम गति हैं; अविनाशी पुरुष, साक्षी, क्षेत्रज्ञ और अक्षर तत्त्व हैं।
3
योगो योगविदां नेता प्रधानपुरुषेश्वरः।
नारसिंहवपुः श्रीमान् केशवः पुरुषोत्तमः॥
Yogo yogavidāṁ netā pradhāna-puruṣeśvaraḥ.
Nārasiṁha-vapuḥ śrīmān Keśavaḥ Puruṣottamaḥ.
वे योग, योगवेत्ताओं के नेता, प्रकृति और पुरुष के ईश्वर, नृसिंहरूप, श्रीमान केशव और पुरुषोत्तम हैं।
पाठ मार्गदर्शन
इस स्तोत्र का उपयोग कैसे करें
पहले अर्थ पढ़ें
हर पद का भाव समझकर पाठ को केवल ध्वनि नहीं, चिंतन भी बनाएँ।
धीरे उच्चारण करें
सरल गति रखें; जहाँ उच्चारण अनिश्चित हो वहाँ विश्वसनीय शिक्षक या रिकॉर्डिंग से जाँचें।
स्रोत की सीमा जानें
यह चुना हुआ अंश है, विधिवत अनुष्ठान का पूर्ण पाठ नहीं।
परंपरागत स्रोत:
Mahabharata, Anushasana Parva