नवरात्रि गाइड
मंत्र, चक्र और ग्रह-ऊर्जाओं का विज्ञान
तंत्र और भक्ति दोनों चक्रों (रीढ़ के साथ ऊर्जा के केंद्र) और उन्हें स्पंदित करने वाले मंत्रों की चर्चा करते हैं। नवरात्रि की नौ रातें शिक्षण-गीतों में प्रायः नौ चक्रों या नौ ग्रहों से जोड़ी जाती हैं। आपको कल्पना पर ज़ोर डालने की आवश्यकता नहीं है; मंत्र जपते समय हृदय पर हल्का-सा ध्यान रखना ही काफ़ी है। यह लेख भक्ति-भाव में रहता है और किसी चिकित्सकीय ऊर्जा-उपचार का दावा नहीं करता।
मूलाधार से सहस्रार तक
शाम के जप से पहले एक मिनट सुरक्षित भूमि पर नंगे पाँव चलें। यह धरती से जुड़ने का सरल अभ्यास है।
चक्रों के ‘खुलने’ की धुन में न पड़ें। अहंकार अध्यात्म को भी अपना साधन बना सकता है, इसलिए विनम्र रहें।
मंत्र का कंपन
“दुं” बोलते समय छाती में हल्की गूँज महसूस हो तो ठीक है, न हो तो उस पर ध्यान न दें। साधना अनुभव पर नहीं, श्रद्धा पर टिकी है।
गृहस्थों के लिए ज़ोर से चिल्लाकर जप करना आवश्यक नहीं है। धीमा, स्पष्ट और भावपूर्ण उच्चारण अधिक प्रभावी माना गया है।
ग्रहों के दिन
कुछ सूचियों में रविवार को लाल रंग का संबंध सूर्य और शैलपुत्री से जोड़ा जाता है। इसे याद रखने की मनोरंजक युक्ति समझें।
इसे कठोर नियम न बनाएँ। यदि किसी दिन वह रंग उपलब्ध न हो तो भक्ति में कोई कमी नहीं आती।
चंद्रघंटा और कंठ
इससे उस दिन ईमानदार बातचीत के लिए वाणी खुलती है। सच्ची और संयमित वाणी चंद्रघंटा का वरदान मानी जाती है।
उसके बाद एक घूँट पानी पिएँ और गले की देखभाल करें। साधना में शरीर का ख़याल रखना भी ज़रूरी है।
एकीकृत अभ्यास
हृदय या नाभि में से कोई एक चुनें और नौ दिन उसी पर ध्यान रखें। एक स्थान पर ठहरने से मन स्थिर होता है।
हर दिन बदलने से आरंभ करने वालों का मन उलझ जाता है, इसलिए एक ही केंद्र पर टिके रहें।
विनम्रता
यदि किसी दर्शन या झनझनाहट से अहंकार जागे तो सरल सेवा पर लौट आएँ। सेवा अहंकार को सबसे जल्दी शांत करती है।
कुंडलिनी की बढ़ी-चढ़ी बातों को गुरु ही सही दिशा दे सकते हैं। यदि बेचैनी हो तो किसी अनुभवी से मार्गदर्शन लें।
FAQ
नहीं। श्रद्धा और सद्गुण संवेदनाओं से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण हैं।
हाँ। आज ही दीपक और एक मंत्र से आरंभ करें। माँ सच्चे मन से आए हुए हर भक्त को स्वीकार करती हैं।