पर्व एवं देवता
महत्व
वसंत पंचमी बसंत ऋतु के आगमन और ज्ञान, संगीत, कला एवं वाणी की देवी माँ सरस्वती के प्राकट्य का पावन दिन है। इस दिन शिक्षा व कला में सफलता का वरदान प्राप्त होता है।
उत्सव सामग्री सूची
- माँ सरस्वती का चित्र या मूर्ति
- चौकी के लिए पीला कपड़ा और पहनने के लिए पीले वस्त्र
- पीले फूल (गेंदा या सरसों के फूल)
- किताबें, पेन, लैपटॉप या वाद्य यंत्र
- मीठे पीले चावल या बेसन/बूंदी के लड्डू
- सफेद चंदन और घी का दीपक
पूजा विधि — चरणबद्ध
चरण 1
पीला श्रृंगार एवं विद्या साधन पूजन
शास्त्रानुसार: पीले वस्त्र धारण करें। चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। माँ सरस्वती को स्थापित करें और उनके चरणों में अपनी पुस्तकें, पेन, लैपटॉप या वाद्य यंत्र रखें।
ॐ ऎं सरस्वतै नमः।
चरण 2
चंदन तिलक एवं पीला पुष्प अर्पण
माँ सरस्वती को सफेद चंदन और रोली का तिलक लगाएं। अपनी पुस्तकों और पेन पर भी तिलक लगाएं। गेंदे या सरसों के पीले फूल अर्पित करें।
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
चरण 3
पीला भोग अर्पण
केसरिया मीठे चावल, राजभोग या पीले लड्डू का भोग लगाएं और स्वच्छ जल अर्पित करें।
ॐ वाग्देव्यै च विद्महे कामराजाय धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्।
चरण 4
सरस्वती वंदना एवं विद्यारंभ
'या कुन्देन्दुतुषारहारधवला' वंदना का पाठ करें। विद्यार्थी कागज़ पर 'ॐ' या 'ऐं' लिखकर शुभ विद्यारंभ करें।
सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि।विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥