पर्व एवं देवता
महत्व
दीपावली की रात माँ लक्ष्मी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं। इस दिन माँ लक्ष्मी और कोषाध्यक्ष कुबेर जी की पूजा से घर में सुख, शांति, अन्न-धन और स्थायी वैभव का आगमन होता है।
उत्सव सामग्री सूची
- लक्ष्मी जी, गणेश जी और कुबेर जी का चित्र/मूर्ति
- मिट्टी के दिए (कम से कम 11, 21 या 31), सरसों का तेल/घी और बत्ती
- एक बड़ा चौमुखी दीपक
- खील, बताशे और कमल के फूल
- नकद धन, चांदी के सिक्के, बहीखाता/लैपटॉप और आभूषण
- साबुत धनिया और कमलगट्टा
पूजा विधि — चरणबद्ध
चरण 1
पूजा वेदी तैयारी एवं कुबेर स्थापना
शास्त्रानुसार: यह पूजा प्रदोष काल में करें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। मध्य में माँ लक्ष्मी, उनकी दाहिनी ओर गणेश जी और बाईं ओर तिजोरी/चांदी के सिक्के (कुबेर स्थान) रखें।
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सिद्ध लक्ष्म्यै नमः।
चरण 2
बहीखाता एवं धन-लक्ष्मी पूजन
बहीखाते, लैपटॉप या तिजोरी पर रोली से स्वास्तिक बनाएं। चांदी के सिक्कों पर हल्दी-कुमकुम का तिलक लगाएं। साबुत धनिया और कमलगट्टा अर्पित करें। माँ लक्ष्मी को कमल का फूल चढ़ाएं।
ॐ कुबेराय नमःॐ धनेश्वरै नमः
चरण 3
खील-बताशा भोग एवं मुख्य चौमुखी दीप
खील और बताशे का मुख्य भोग लगाएं। भगवान के सम्मुख बड़ा चौमुखी घी का दीपक जलाएं; यह मुख्य दीपक पूरी रात जलना चाहिए।
नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोस्तु ते॥
चरण 4
महालक्ष्मी आरती एवं गृहांगण दीप प्रज्वलन
'ॐ जय लक्ष्मी माता' आरती गाएं। मुख्य वेदी के दीपक से अन्य सभी मिट्टी के दीयों को जलाएं और उन्हें घर के मुख्य द्वार, खिड़कियों और आंगन में सजाएं।
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।