राजा शिबी अपने न्याय और दयालु स्वभाव के लिए प्रसिद्ध थे। एक दिन एक डरा हुआ कबूतर उनकी गोद में आकर बोला, 'राजा, मेरी रक्षा करो, एक बाज मेरा शिकार करना चाहता है!' तभी वहां बाज आ गया और बोला, 'यह मेरा भोजन है, आप इसे मुझसे नहीं छीन सकते।' राजा शिबी ने धर्म संकट में पड़कर एक महान रास्ता निकाला। उन्होंने कहा, 'मैं कबूतर की जान बचाने के लिए अपने शरीर से उसके वजन के बराबर मांस तुम्हें देता हूं।' उन्होंने तराजू पर कबूतर के सामने अपना मांस रखा। उनकी यह दयालुता देखकर देवता प्रकट हुए और उनकी प्रशंसा की।