एक शांत झील के पास एक जादुई सुवर्ण हंस रहता था, जिसके पंख सोने के थे। पास ही एक गरीब माँ और उसकी बेटियां रहती थीं जो बहुत संघर्ष कर रही थीं। एक दिन वह हंस उनके आंगन में उतरा और सोने का एक पंख गिराकर बोला, 'इसे बेचकर अपना गुजारा चलाओ।' परिवार बहुत खुश हुआ। हंस रोज़ आने लगा। लेकिन माँ को और लालच आ गया। उसने सोचा, 'क्यों न मैं इसे पकड़कर सारे सोने के पंख एक साथ ही तोड़ लूं?' जब उसने ऐसा किया, तो वे जादुई पंख साधारण पंखों में बदल गए! लालच ने सब कुछ बिगाड़ दिया।