लंका के अशोक वाटिका में बंदी रहने के दौरान माता सीता को रोज डराया-धमकाया गया ताकि उनका हौसला टूट जाए। वे अकेली थीं और राम से दूर थीं। लेकिन सीता जी ने कभी हिम्मत नहीं हारी। वे एक पेड़ के नीचे शांत बैठकर भगवान राम का स्मरण करती रहीं। उनकी मानसिक ताकत और धैर्य ने उन्हें टूटने नहीं दिया। जब हनुमान जी वहां पहुंचे, तो सीता जी का अटूट विश्वास ही उनकी असली ताकत साबित हुआ।