राजकुमारी सावित्री बहुत बुद्धिमान और दृढ़ संकल्प वाली महिला थीं। उन्होंने राजकुमार सत्यवान से शादी की, हालांकि भविष्य में यह लिखा था कि सत्यवान की आयु कम है। जब वह दिन आया और यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए, तो सावित्री रोई नहीं, बल्कि हिम्मत जुटाकर यमराज के पीछे-पीछे चल पड़ीं। उनकी निष्ठा देखकर यमराज ने उन्हें कई वरदान दिए। सावित्री ने अपनी बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल करके ऐसे चतुर वरदान मांगे कि यमराज को अंत में सत्यवान का जीवन वापस देना ही पड़ा! यमराज उनकी समझदारी और प्रेम से बहुत प्रसन्न हुए।