एकलव्य सबसे महान गुरु द्रोणाचार्य से तीरंदाजी सीखना चाहते थे, लेकिन शाही स्कूल में प्रवेश नहीं पा सके। क्या उन्होंने हार मान ली? बिल्कुल नहीं! उन्होंने जंगल में गुरु द्रोणाचार्य की एक मिट्टी की मूर्ति बनाई और दिन-रात कड़ी मेहनत से अभ्यास किया। अपनी लगन के दम पर वे दुनिया के सबसे बेहतरीन तीरंदाज बन गए, यह साबित करते हुए कि असली सीख हमारी अपनी मेहनत से आती है।