पावन कथा

श्रीमद्भागवत महापुराण कथा

महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित और शुकदेव जी द्वारा राजा परीक्षित को सुनाई गई परम पवित्र कथा। यह ग्रंथ जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति, भगवद्-लीला रस और श्री कृष्ण के प्रति निष्काम भक्ति का अमृत प्रदान करता है।

संबद्ध देव-देवी

अध्याय 1

राजा परीक्षित को शाप एवं शुकदेव जी का आगमन

महाप्रतापी राजा परीक्षित वन में शिकार खेलते समय प्यास से व्याकुल होकर शमीक ऋषि के आश्रम पहुंचे। ऋषि को ध्यानमग्न देखकर राजा ने अनजाने में उनके गले में मृत सर्प डाल दिया। ऋषि के पुत्र शृंगी ने क्रुद्ध होकर राजा को ७ दिनों के भीतर तक्षक नाग के डंसने से मृत्यु का शाप दे दिया। राजा परीक्षित ने इसे प्रभु की इच्छा मानकर सहर्ष स्वीकार किया, राज-पाट त्यागा और गंगा तट पर मुक्ति मार्ग खोजने पहुंचे। वहाँ परम हंस शुकदेव जी का प्रादुर्भाव हुआ और उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा का ७ दिवसीय परायण प्रारंभ किया।

पठन संदर्भ

कथा, पाठांतर और अभ्यास

यह सार्वजनिक गाइड एक संक्षिप्त भक्तिपूर्ण पुनर्कथन है। विभिन्न पुराणों, रामायण परंपराओं, क्षेत्रों और संप्रदायों में प्रसंग व विवरण अलग हो सकते हैं।

  • पहले कथा पढ़ें, फिर नीचे दिए कथा-पाठ पर विचार करें।
  • व्रत या विधिवत पाठ के लिए अपने परिवार या परंपरा के स्वीकृत संस्करण का प्रयोग करें।
  • संबद्ध देवता गाइड से प्रतीक और उपासना संदर्भ समझें।

कथा-पाठ

दिव्य लीला-श्रवण आत्मा को मृत्युभय से मुक्त करता है।

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