पावन कथा

गोवर्धन लीला एवं अन्नकूट कथा

श्रीमद्भागवत महापुराण की वह सुप्रसिद्ध लीला जो प्रकृति संरक्षण, धार्मिक अहंकार के त्याग और भयमुक्त होकर केवल ईश्वर की शरण में जाने का संदेश देती है।

संबद्ध देव-देवी

अध्याय 1

इंद्र-पूजा का निषेध एवं गोवर्धन पूजन का प्रस्ताव

नंदबाबा और ब्रजवासियों को इंद्र के यज्ञ की तैयारी करते देखकर बालक कृष्ण ने उनसे प्रश्न किया। कृष्ण ने समझाया कि वर्षा प्रकृति का चक्र है और ब्रजवासियों का वास्तविक पोषण गोवर्धन पर्वत, वन और गौएँ करती हैं। कृष्ण के तर्कों से सहमत होकर ब्रजवासियों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की और छप्पन भोग का अन्नकूट उत्सव मनाया।

पठन संदर्भ

कथा, पाठांतर और अभ्यास

यह सार्वजनिक गाइड एक संक्षिप्त भक्तिपूर्ण पुनर्कथन है। विभिन्न पुराणों, रामायण परंपराओं, क्षेत्रों और संप्रदायों में प्रसंग व विवरण अलग हो सकते हैं।

  • पहले कथा पढ़ें, फिर नीचे दिए कथा-पाठ पर विचार करें।
  • व्रत या विधिवत पाठ के लिए अपने परिवार या परंपरा के स्वीकृत संस्करण का प्रयोग करें।
  • संबद्ध देवता गाइड से प्रतीक और उपासना संदर्भ समझें।

कथा-पाठ

अहंकारी पूजा से बढ़कर प्रकृति का सम्मान; शरण गोवर्धन कृपा में है।

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