अध्याय 1
नगर का पतन एवं भक्तिमति शीला की धर्मनिष्ठा
एक समृद्ध नगर में लोग आनंद से रहते थे, किंतु कुसंगति, जुआ और अहंकार के कारण धीरे-धीरे लोगों का नैतिक पतन होने लगा। उसी नगर में शीला नाम की एक धर्मनिष्ठ स्त्री अपने पति के साथ रहती थी। उसका पति भी बुरी संगति में पड़कर सारा धन गंवा बैठा, किंतु शीला ने धैर्य, सदाचार और ईश्वर पर विश्वास कभी नहीं छोड़ा।
अध्याय 2
वृद्ध स्त्री रूप में माँ लक्ष्मी का आगमन एवं व्रत विधान
एक शुक्रवार की दोपहर एक तेजस्वी वृद्ध स्त्री शीला के द्वार आई। शीला ने अत्यंत आदर से उन्हें जल दिया और सेवा की। वह वृद्ध स्त्री साक्षात माँ लक्ष्मी थीं। उन्होंने शीला को वैभव लक्ष्मी व्रत की सरल विधि बताई—शुक्रवार को व्रत रखना, लाल वस्त्र पर चावल व चाँदी का सिक्का/आभूषण रखकर पूजन करना, खीर का भोग लगाना और व्रत पूर्ण होने पर ७, ११ या २१ पुस्तकों का उद्यापन करना।
अध्याय 3
व्रत का पालन, उद्यापन एवं वैभव की प्राप्ति
शीला ने पूर्ण श्रद्धा और निष्ठा से वैभव लक्ष्मी व्रत का पालन और विधिपूर्वक उद्यापन किया। व्रत के प्रभाव से उसके पति की बुद्धि सुधर गई, व्यापार पुनः चलने लगा और घर धन-धान्य तथा शांति से भर गया। शीला को देखकर नगर की अन्य स्त्रियों ने भी इस व्रत को अपनाया और संपूर्ण नगर में पुनः सुख-समृद्धि छा गई।
पठन संदर्भ
कथा, पाठांतर और अभ्यास
यह सार्वजनिक गाइड एक संक्षिप्त भक्तिपूर्ण पुनर्कथन है। विभिन्न पुराणों, रामायण परंपराओं, क्षेत्रों और संप्रदायों में प्रसंग व विवरण अलग हो सकते हैं।
- पहले कथा पढ़ें, फिर नीचे दिए कथा-पाठ पर विचार करें।
- व्रत या विधिवत पाठ के लिए अपने परिवार या परंपरा के स्वीकृत संस्करण का प्रयोग करें।
- संबद्ध देवता गाइड से प्रतीक और उपासना संदर्भ समझें।