अध्याय 1
समुद्र लंघन एवं विघ्न निवारण
जामवंत जी द्वारा शक्तियां याद दिलाने पर हनुमान जी ने महेंद्र पर्वत से लंका की ओर विशाल छलांग लगाई। मार्ग में उन्होंने मैनाक पर्वत को आदरपूर्वक प्रणाम किया, सुरसा को बुद्धि से संतुष्ट किया और छाया पकड़ने वाली सिंहिका राक्षसी का वध कर सकुशल लंका के तट पर प्रवेश किया।
अध्याय 2
लंका प्रवेश एवं माता सीता से मिलन
हनुमान जी ने सूक्ष्म रूप धारण कर लंका के द्वार पर लंकिनी को परास्त किया। लंका में विभीषण का रामभक्त घर देखकर वे उनसे मिले। विभीषण के बताने पर वे अशोक वाटिका पहुंचे, जहां माता सीता वृक्ष के नीचे दुखी बैठी थीं। हनुमान जी ने श्री राम की मुद्रिका (अंगूठी) नीचे गिराई और प्रभु का दूत बनकर राम-कथा सुनाई, जिससे माता सीता का हृदय आशा और विश्वास से भर गया।
अध्याय 3
अशोक वाटिका विध्वंस, रावण संवाद एवं लंका दहन
भूख लगने पर हनुमान जी ने अशोक वाटिका के फल खाए और वाटिका को उजाड़कर रावण के पुत्र अक्षय कुमार का वध किया। इंद्रजीत ने ब्रह्मास्त्र से हनुमान जी को बंदी बनाकर रावण की सभा में प्रस्तुत किया। हनुमान जी ने रावण को निर्भीक होकर चेतावनी दी कि वह सीताजी को राम जी को सौंप दे। क्रोधित होकर रावण ने उनकी पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया। हनुमान जी ने विशाल रूप धारण कर पूरी सोने की लंका को जलाकर राख कर दिया और वापस लौटकर श्री राम को माता सीता की चूड़ामणि सौंपी।
पठन संदर्भ
कथा, पाठांतर और अभ्यास
यह सार्वजनिक गाइड एक संक्षिप्त भक्तिपूर्ण पुनर्कथन है। विभिन्न पुराणों, रामायण परंपराओं, क्षेत्रों और संप्रदायों में प्रसंग व विवरण अलग हो सकते हैं।
- पहले कथा पढ़ें, फिर नीचे दिए कथा-पाठ पर विचार करें।
- व्रत या विधिवत पाठ के लिए अपने परिवार या परंपरा के स्वीकृत संस्करण का प्रयोग करें।
- संबद्ध देवता गाइड से प्रतीक और उपासना संदर्भ समझें।