अध्याय 1
शिव-पार्वती का अमरावती आगमन एवं पुजारी पर कृपा
भगवान शिव और माता पार्वती अमरावती नगर के एक सुंदर मंदिर में पधारे। क्रीड़ा के दौरान माता पार्वती ने चौपड़ खेलने का प्रस्ताव रखा। खेल समाप्त होने से पूर्व ही मंदिर के पुजारी ने शिव जी की विजय की भविष्यवाणी कर दी, किंतु अंत में पार्वती जी जीत गईं। असत्य बोलने के कारण पार्वती जी ने पुजारी को कोढ़ी होने का श्राप दे दिया। बाद में देवकन्याओं के बताने पर पुजारी ने भक्तिभाव से १६ सोमवार का व्रत किया और शापमुक्त होकर पूर्ण स्वस्थ हो गया।
अध्याय 2
राजकन्या का विवाह एवं व्रत का प्रभाव
पुजारी को स्वस्थ देखकर माता पार्वती प्रसन्न हुईं और व्रत की महिमा समझकर कार्तिकेय जी को बताई, जिससे माता-पुत्र का मनमुटाव दूर हुआ। तत्पश्चात, एक राजकन्या ने प्रतिज्ञा की कि राजहाथी जिसके गले में वरमाला डालेगा, वही उसका पति बनेगा। १६ सोमवार व्रत का पालन कर रहे एक साधारण निर्धन ब्राह्मण युवक के गले में हाथी ने वरमाला डाल दी, जिससे उसका राजकुमारी के साथ भव्य विवाह हुआ।
अध्याय 3
व्रत के अनादर से संकट और पुनः सुख की प्राप्ति
राजा बनने के पश्चात युवक नियमित सोमवार व्रत करता रहा, किंतु रानी ने अहंकारवश व्रत में भाग नहीं लिया और प्रसाद का निरादर किया। इसके परिणामस्वरूप उन पर घोर संकट आया और उन्हें राज्य गंवाकर वन-वन भटकना पड़ा। अपनी भूल का अहसास होने पर रानी ने रो-रोकर प्रभु से क्षमा मांगी और पूर्ण श्रद्धा से १६ सोमवार का व्रत किया। भगवान शिव की कृपा से उनका खोया हुआ राज्य और संपूर्ण सुख-समृद्धि पुनः वापस लौट आई।
पठन संदर्भ
कथा, पाठांतर और अभ्यास
यह सार्वजनिक गाइड एक संक्षिप्त भक्तिपूर्ण पुनर्कथन है। विभिन्न पुराणों, रामायण परंपराओं, क्षेत्रों और संप्रदायों में प्रसंग व विवरण अलग हो सकते हैं।
- पहले कथा पढ़ें, फिर नीचे दिए कथा-पाठ पर विचार करें।
- व्रत या विधिवत पाठ के लिए अपने परिवार या परंपरा के स्वीकृत संस्करण का प्रयोग करें।
- संबद्ध देवता गाइड से प्रतीक और उपासना संदर्भ समझें।