पावन कथा

शिव पुराण कथा

भगवान शिव की महिमा, दिव्य लीलाओं, योग, तपस्या और असीम कृपा का वर्णन करने वाली पवित्र कथा। यह कथा प्रकट करती है कि कैसे देवाधिदेव महादेव निराकार और गुणातीत होते हुए भी सरल भक्ति से प्रसन्न होकर भक्तों का कल्याण और मोक्ष प्रदान करते हैं।

संबद्ध देव-देवी

अध्याय 1

लिंगोद्भव प्राकट्य एवं शिव लिंग की महिमा

सृष्टि के प्रारंभ में ब्रह्मा और विष्णु के मध्य श्रेष्ठता को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। उनके अहंकार को शांत करने के लिए भगवान शिव एक अनंत ज्योतिर्मय स्तंभ (ज्योतिर्लिंग) के रूप में प्रकट हुए। ब्रह्मा जी हंस रूप धारण कर ऊपर और विष्णु जी वराह रूप धारण कर नीचे अंत खोजने गए, किंतु दोनों ही अंत न पा सके। विष्णु जी ने सत्य स्वीकार किया, जबकि ब्रह्मा जी ने केतकी के फूल से झूठी साक्षी दिलाई। शिव जी प्रकट हुए और सत्यनिष्ठा के लिए विष्णु जी को आशीर्वाद दिया तथा ब्रह्मा जी की पूजा का अधिकार समाप्त कर यह सिद्ध किया कि शिव लिंग अनंत और निराकार ब्रह्म का प्रतीक है।

पठन संदर्भ

कथा, पाठांतर और अभ्यास

यह सार्वजनिक गाइड एक संक्षिप्त भक्तिपूर्ण पुनर्कथन है। विभिन्न पुराणों, रामायण परंपराओं, क्षेत्रों और संप्रदायों में प्रसंग व विवरण अलग हो सकते हैं।

  • पहले कथा पढ़ें, फिर नीचे दिए कथा-पाठ पर विचार करें।
  • व्रत या विधिवत पाठ के लिए अपने परिवार या परंपरा के स्वीकृत संस्करण का प्रयोग करें।
  • संबद्ध देवता गाइड से प्रतीक और उपासना संदर्भ समझें।

कथा-पाठ

अनंत सत्य अहंकार तोड़ता है; करुणा संसार के लिए विष पीती है।

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