Rigveda 8.73

१८ गोपवन आत्रेय: सप्तवध्रिर्वा । अश्विनौ ।गायत्री ।

8.73.1

उदी॑राथामृताय॒ते यु॒ञ्जाथा॑मश्विना॒ रथ॑म् | अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ||

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Source: DharmicData Sanskrit; Griffith English via rigveda-online (public domain)

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8.73.1

उदी॑राथामृताय॒ते यु॒ञ्जाथा॑मश्विना॒ रथ॑म् | अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ||

8.73.2

नि॒मिष॑श्चि॒ज्जवी॑यसा॒ रथे॒ना या॑तमश्विना | अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ||

8.73.3

उप॑ स्तृणीत॒मत्र॑ये हि॒मेन॑ घ॒र्मम॑श्विना | अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ||

8.73.4

कुह॑ स्थ॒: कुह॑ जग्मथु॒: कुह॑ श्ये॒नेव॑ पेतथुः | अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ||

8.73.5

यद॒द्य कर्हि॒ कर्हि॑ चिच्छुश्रू॒यात॑मि॒मं हव॑म् | अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ||

8.73.6

अ॒श्विना॑ याम॒हूत॑मा॒ नेदि॑ष्ठं या॒म्याप्य॑म् | अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ||

8.73.7

अव॑न्त॒मत्र॑ये गृ॒हं कृ॑णु॒तं यु॒वम॑श्विना | अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ||

8.73.8

वरे॑थे अ॒ग्निमा॒तपो॒ वद॑ते व॒ल्ग्वत्र॑ये | अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ||

8.73.9

प्र स॒प्तव॑ध्रिरा॒शसा॒ धारा॑म॒ग्नेर॑शायत | अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ||

8.73.10

इ॒हा ग॑तं वृषण्वसू शृणु॒तं म॑ इ॒मं हव॑म् | अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ||

8.73.11

किमि॒दं वां॑ पुराण॒वज्जर॑तोरिव शस्यते | अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ||

8.73.12

स॒मा॒नं वां॑ सजा॒त्यं॑ समा॒नो बन्धु॑रश्विना | अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ||

8.73.13

यो वां॒ रजां॑स्यश्विना॒ रथो॑ वि॒याति॒ रोद॑सी | अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ||

8.73.14

आ नो॒ गव्ये॑भि॒रश्व्यै॑: स॒हस्रै॒रुप॑ गच्छतम् | अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ||

8.73.15

मा नो॒ गव्ये॑भि॒रश्व्यै॑: स॒हस्रे॑भि॒रति॑ ख्यतम् | अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ||

8.73.16

अ॒रु॒णप्सु॑रु॒षा अ॑भू॒दक॒र्ज्योति॑ॠ॒ताव॑री | अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ||

8.73.17

अ॒श्विना॒ सु वि॒चाक॑शद्वृ॒क्षं प॑रशु॒माँ इ॑व | अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ||

8.73.18

पुरं॒ न धृ॑ष्ण॒वा रु॑ज कृ॒ष्णया॑ बाधि॒तो वि॒शा | अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ||