7.117.1
१ अथर्वाङ्गिराः | इन्द्रः | पथ्याबृहती | आ म॒न्द्रैरि॑न्द्र॒ हरि॑भिर्या॒हि म॒यूर॑रोमभिः | मा त्वा॒ के चि॒द् वि य॑म॒न् विं न पा॒शिनोऽति॒ धन्वे॑व॒ ताँ इ॑हि ||
शत्रुनिवारणम्।
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१ अथर्वाङ्गिराः | इन्द्रः | पथ्याबृहती | आ म॒न्द्रैरि॑न्द्र॒ हरि॑भिर्या॒हि म॒यूर॑रोमभिः | मा त्वा॒ के चि॒द् वि य॑म॒न् विं न पा॒शिनोऽति॒ धन्वे॑व॒ ताँ इ॑हि ||
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Source: DharmicData / AtharvaVeda (Sanskrit text)
This reader preserves the available Sanskrit and attributed translation. A modern interpretation is shown only when reviewed text exists in the source record.
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१ अथर्वाङ्गिराः | इन्द्रः | पथ्याबृहती | आ म॒न्द्रैरि॑न्द्र॒ हरि॑भिर्या॒हि म॒यूर॑रोमभिः | मा त्वा॒ के चि॒द् वि य॑म॒न् विं न पा॒शिनोऽति॒ धन्वे॑व॒ ताँ इ॑हि ||