7.103.1
१ ब्रह्म | आत्मा | त्रिष्टुप् | को अ॒स्या नो॑ द्रु॒होऽव॒द्यव॑त्या॒ उन्ने॑ष्यति क्ष॒त्रियो॒ वस्य॑ इ॒च्छन् | को य॒ज्ञका॑मः॒ क उ॒ पूर्ति॑कामः॒ को दे॒वेषु॑ वनुते दी॒र्घमायुः॑ ||
क्षत्रियः।
7.103.1
१ ब्रह्म | आत्मा | त्रिष्टुप् | को अ॒स्या नो॑ द्रु॒होऽव॒द्यव॑त्या॒ उन्ने॑ष्यति क्ष॒त्रियो॒ वस्य॑ इ॒च्छन् | को य॒ज्ञका॑मः॒ क उ॒ पूर्ति॑कामः॒ को दे॒वेषु॑ वनुते दी॒र्घमायुः॑ ||
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Source: DharmicData / AtharvaVeda (Sanskrit text)
This reader preserves the available Sanskrit and attributed translation. A modern interpretation is shown only when reviewed text exists in the source record.
7.103.1
१ ब्रह्म | आत्मा | त्रिष्टुप् | को अ॒स्या नो॑ द्रु॒होऽव॒द्यव॑त्या॒ उन्ने॑ष्यति क्ष॒त्रियो॒ वस्य॑ इ॒च्छन् | को य॒ज्ञका॑मः॒ क उ॒ पूर्ति॑कामः॒ को दे॒वेषु॑ वनुते दी॒र्घमायुः॑ ||