Atharvaveda 4.33

पाप-नाशनम्

4.33.1

१-८ ब्रह्म | पाप्मनाशनोऽग्निः | गायत्री | अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घमग्ने॑ शुशु॒ग्ध्या र॒यिम् | अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम् ||

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Source: DharmicData / AtharvaVeda (Sanskrit text)

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4.33.1

१-८ ब्रह्म | पाप्मनाशनोऽग्निः | गायत्री | अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घमग्ने॑ शुशु॒ग्ध्या र॒यिम् | अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम् ||

4.33.2

सु॒क्षे॒त्रि॒या सु॑गातु॒या व॑सू॒या च॑ यजामहे | अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम् ||

4.33.3

प्र यद् भन्दि॑ष्ठ एषां॒ प्रास्माका॑सश्च सू॒रयः॑ | अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम् ||

4.33.4

प्र यत् ते॑ अग्ने सू॒रयो॒ जाये॑महि॒ प्र ते॑ व॒यम् | अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम् ||

4.33.5

प्र यद॒ग्नेः सह॑स्वतो वि॒श्वतो॒ यन्ति॑ भा॒नवः॑ | अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम् ||

4.33.6

त्वं हि वि॑श्वतोमुख वि॒श्वतः॑ परि॒भूरसि॑ | अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम् ||

4.33.7

द्विषो॑ नो विश्वतोमु॒खाति॑ ना॒वेव॑ पारय | अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम् ||

4.33.8

स नः॒ सिन्धु॑मिव ना॒वाति॑ पर्ष स्व॒स्तये॑ | अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम् ||